बसों-टैक्सियों में स्कूली बच्चों की जान हथेली पर सुबह-सवेरे एक ओर जहां लोग सैर को निकलते हैं, वहीं छोटे-छोटे बच्चे पीठ पर बस्ता उठाए स्कूल जा रहे होते हैं। हर सुबह पौने सात बजे यह सिलसिला शुरू हो जाता है, पर किन दिक्कतों से जूझते हुए ये मासूम स्कूल की दहलीज तक पहुंचते हैं, सुबह-सवेरे की इस कड़ी में जानें पूरा सच… सुबह-सवेरे नहलाकर साफ-सुथरी वर्दी पहनाकर आप बच्चों को बड़े लाड़ से स्कूल के लिए तैयार करते हैं, पर स्कूल बस में चढ़ते ही बच्चों की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। मतलब, भारी भीड़ के चलते खड़े होकर स्कूल तक सफर करना, बस की छत पर खुद बैग रखना, घंटों जाम में फंसे रहना आदि कई ऐसी दिक्कते हैं, जिन्हें न तो स्कूल प्रबंधन समझता है और न ही प्रशासन। सुबह-सवेरे की इस कड़ी में जानें स्कूली गाडि़यों का हाल और उसमें दिक्कतों से दो चार होते स्कूली बच्चे। जानकारी के अनुसार पर्यटन नगरी धर्मशाला में शुक्रवार और शनिवार सुबह साढ़े छह से नौ बजे के बीच कचहरी चौक, शिक्षा बोर्ड, पोस्ट आफिस, कोतवाली बाजार, श्यामनगर, रामनगर, बड़ोल, दाड़ी आईटीआई चौक, दाड़ी बाइपास, ...