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स्वर्ग लोक में स्वच्छता अभियान

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स्वर्ग लोक में स्वच्छता अभियान   30अक्टूबर, 2014 JL VERMA भारत देश में 2 अक्टूबर को प्रारम्भ हुये स्वच्छता अभियान के दौरान उड़ी धूल की गर्द स्वर्गलोक तक पहुंची तो देवगणों को सांस लेने में तकलीफ़ होने लगी। उनको लगा कि कहीं यह कोई नये तरह की तपस्या तो नहीं जिसके द्वारा कोई स्वर्गलोक पर कब्जे की कोशिश कर रहा हो। फ़ौरन नारद जी को माजरा समझने के लिये भारत देश भेजा गया। नारद जी पलक झपकते ही नयी दिल्ली की वाल्मीकि कालोनी पहुंच गये। उसके अलावा और जगह घूम घूमकर उन्होंने स्वच्छता अभियान की वीडियो क्लिप बनाई और वापस देवलोक चल दिये। नारद जी जैसे ही वीणा टुनटुनाते हुये स्वर्गलोक पहुंचे उनको देवगणों ने मुख्य द्वार पर ही घेर लिया और पूछने लगे-"हे नारद, क्या खबर लाये हो? सुना है कोई स्वच्छता अभियान प्रारम्भ किया गया है! क्या यह कोई नया अनुष्ठान है? क्या यह देवाधिदेव की कोई नयी लीला है या फ़िर किसी राक्षस का उत्पात? इसमें क्या हमें पुष्पवर्षा के लिये जाना होगा? कृपया शीघ्र बतायें! हमारे हलक सूख रहे हैं परन्तु हम मारे चिंता के सोमरस का पान नहीं कर पा रहे है...

इस चक्रवात का नाम 'हुदहुद' क्यों?

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इस चक्रवात का नाम 'हुदहुद' क्यों? क्या आपको 'हुदहुद' चक्रवात के बारे में पता है कि इसकी जड़ें ओमान में हैं. हम चक्रवात के नाम की बात कर रहे हैं न कि तूफ़ान की. यह चक्रवात बंगाल की खाड़ी में उत्तरी अंडमान के पास उठा है और अब यह आंध्रप्रदेश और ओडिशा की तरफ़ तेज़ी से बढ़ रहा है. मगर इसका नाम ओमान में रखा गया है. हुदहुद अरबी भाषा में हूपु नाम की चिड़िया को कहा जाता है. पढ़ें पूरी ख़बर: कैसे रखे जाते हैं चक्रवातों के नाम 1953 से मायामी नेशनल हरीकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता आ रहा है. डब्लूएमओ जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी है. मगर उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखा गया था क्योंकि ऐसा करना काफ़ी विवादास्पद काम था. भारत के चक्रवात चेतावनी केंद्र के प्रमुख डॉक्टर एम माहापात्रा के मुताबिक़ इसके पीछे कारण यह था कि जातीय विविधता वाले इस क्षेत्र में हमें काफ़ी सावधान और निष्पक्ष रहने की ज़रूरत थी ताकि यह लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए. ड...