गणित हौवा नहीं जीवन का हिस्सा है गणित को सामान्यतः लोग एक नीरस विषय मानते हैं क्योंकि गणित के आधारभूत नियमों और सूत्रों की जानकारी के अभाव में गणित को समझना कठिन है ; साथ ही गणित को समझने में सूझ एवं तर्क शक्ति की परम आवश्यकता होती है। अतः मस्तिष्क पर दबाव डालना पड़ता है। जिनके पास सूझ , तर्क शक्ति एवं अच्छी स्मरण शक्ति है , उन लोगों के लिए गणित एक आनन्द का सागर है। समस्याओं से खेलना उनके लिए कष्ट-प्रद न होकर आनन्द-प्रद होता है। समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान मिलने पर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा तथा अपार प्रसन्नता मिलती है। गणित अपने आपमें रहस्यों का संसार है। जिज्ञासु जब इस रहस्यमय संसार में प्रविष्ट करता है तो एक के बाद एक नये रहस्य सामने आने लगते हैं। रहस्यों के अनावृत्त होने पर यह रहस्यमय संसार परलोक में बदल जाता है। प्रस्तुत पत्रिका अंबिका दर्शन का उद्देश्य पाठकों को गणित सम्बन्धी कुछ सामान्य बातों की जानकारी प्रदान कर गणित के प्रति रुचि जाग्रत करना है , जिससे कि वे इससे मिलने वाले आनन्द को प्राप्त करने से वंचित न रहें। बच्चों से लेकर वयस्कों तक गणित के प्रति एक उद...
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