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मानव क्यों होता है निराश?

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मानव क्यों होता है निराश? ...

डिब्बाबंद भोजन- स्वास्थ्यप्रद या धीमा जहर

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डिब्बाबंद भोजन- स्वास्थ्यप्रद या धीमा जहर -सचिन कुमार जैन भारत सरकार के गलियारों में हाल ही में हुई एक बैठक ने एक नई चुनौती के बढ़ने का संकेत दे दिया है। 26 अगस्त 2014 को खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हर सिमरत कौर और पेप्सी कंपनी की अध्यक्ष इंदिरा नूयी के बीच यह चर्चा हुई कि मध्याह्न भोजन योजना (इसमें 8वीं कक्षा तक के 12 करोड़ स्कूली बच्चों को हर रोज उनके हक के रूप में भोजन दिया जाता है) में स्वास्थ्यकर प्रसंस्कृत भोजन दिए जाने के विषय पर चर्चा हुई। इस बैठक ने उनके सबके मन में एक भय पैदा कर दिया है, जो जानते हैं कि बड़ी और बहुराष्ट्रीय कंपनियां जिस तरह के पेय और खाने की सामग्री का उत्पादन और व्यापार करती हैं, उनमें बच्चों को केवल और केवल बीमार बनाने वाले तत्त्व हैं।    शीतल पेय और डिब्बाबंद खाद्य सामग्री बनाने वाली कंपनियां आंगनवाड़ी के पोषण आहार कार्यक्रम और स्कूल मध्याह्न भोजन योजना में ठेका लेने की कोशिश कर रही हैं। यह कोई नई कोशि...

माता-पिता देवता के समान

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माता-पिता देवता के समान WD पं. योगेश शर्मा ने कर्तव्य बोध प्रवचनों में कहा कि माता ममत्व एवं पिता अनुशासन के प्रत्यक्ष देवता होते हैं। इसलिए उपनिषदों में 'मातृ देवो भव, पितृ देवो भव' की बात कहके मंत्र दृष्टा ऋषि-मुनि, पुत्र को कर्तव्य बोध का उपदेश देते हुए माता-पिता को प्रत्यक्ष देवता मानकर उनकी सेवा भक्ति करने का आदेश देते हैं अतः माता-पिता की सेवा से पूरी पृथ्वी की परिक्रमा का फल मिलता है। उन्होंने कहा पिता का स्थान स्वर्ग से भी ऊँचा है। वस्तुतः पिता ही पुत्र का प्रथम मंत्र दृष्टा होता है। क्योंकि कुल परंपरा, गुरु परंपरा का बोध सर्वप्रथम पिता के द्वारा ही प्राप्त होता है। उपनयन संस्कार के समय पिता और आचार्य ही सर्वप्रथम गायत्री मंत्र की दीक्षा पुत्र के कानों में फूँकते हैं। यह क्रिया मात्र दिखावा नहीं है अपितु मंत्र कानों से होता हुआ अंतःकरण में प्रविष्ट होता है, अतः पुत्र का दायित्व है पिता की सदवृत्तियों का अनुसरण करते हुए उनकी भावनाओं का सम्मान करें, पितरों का आशीर्वाद जिसे प्राप्त हो जाता है उसके लिए संसार में कुछ भी ...

आत्म रक्षा के गुण

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