गणित सीखण री जुगत : बाल मेले में
गणित सीखण री जुगत : बाल मेले में जनवरी 27, 2017 “ मैंने सुना मैं भूल गया , मैंने देखा मुझे याद रहा , मैंने किया मैं सीख गया ..... ” उपरोक्त कथन को साकार करती अवधारणा को जमीनी हकीकत का जामा पहनाने के अनकों नवाचारी प्रयोगों में से एक है बाल मेला। बाल मेले के माध्यम से शिक्षा से जुड़े हुए सभी लोग वो चाहे विद्यार्थी हों, शिक्षक हों या हम जैसे शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे कार्यकर्ता उन बुनियादी अवधारणाओं को मूर्त रूप में सीखते–समझते हैं जो किताबों में दर्ज हैं। इन्हीं विचारों को साकार करने के लिए यह प्रयास हमारी टीम के द्वारा “सीखण री जुगत’’ बाल मेला के रूप में किया गया। मेले में बच्चों के लिए सभी विषयों को लेकर तैयारियाँ की गईं थीं। भाषा की करामात (हिंदी एवं इंग्लिश) देखते हुए बच्चे हमारी दुनिया (सामाजिक विज्ञान) को जान रहे थे। बच्चे मस्ती की रेलमपेल करते हुए रंगों के हिंडोले में भी झूले (आर्ट,क्राफ्ट ,ओरेगेमी,खेल)। गणित में माथा-पच्ची करने के साथ ही उन्होंने विज्ञान को करके देखा और परखा। बच्चों के साथ बाल मेला करना एक अनोखी और ...