गणित सीखण री जुगत : बाल मेले में
गणित सीखण री जुगत : बाल मेले में
“ मैंने सुना मैं भूल गया , मैंने देखा मुझे याद रहा , मैंने किया मैं सीख गया .....”
उपरोक्त कथन को साकार करती अवधारणा को जमीनी हकीकत का जामा पहनाने के अनकों नवाचारी प्रयोगों में से एक है बाल मेला। बाल मेले के माध्यम से शिक्षा से जुड़े हुए सभी लोग वो चाहे विद्यार्थी हों, शिक्षक हों या हम जैसे शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे कार्यकर्ता उन बुनियादी अवधारणाओं को मूर्त रूप में सीखते–समझते हैं जो किताबों में दर्ज हैं। इन्हीं विचारों को साकार करने के लिए यह प्रयास हमारी टीम के द्वारा “सीखण री जुगत’’ बाल मेला के रूप में किया गया।
मेले में बच्चों के लिए सभी विषयों को लेकर तैयारियाँ की गईं थीं। भाषा की करामात (हिंदी एवं इंग्लिश) देखते हुए बच्चे हमारी दुनिया (सामाजिक विज्ञान) को जान रहे थे। बच्चे मस्ती की रेलमपेल करते हुए रंगों के हिंडोले में भी झूले (आर्ट,क्राफ्ट ,ओरेगेमी,खेल)। गणित में माथा-पच्ची करने के साथ ही उन्होंने विज्ञान को करके देखा और परखा।
बच्चों के साथ बाल मेला करना एक अनोखी और अनूठी गतिविधि है। उसमें क्या-क्या हुआ और कैसे हुआ, यह बताना आसान होता है। लेकिन किसी विषय आधारित बाल मेले की योजना बनाना और उसके लिए गतिविधियाँ सोचना एक अलग प्रक्रिया है। कोई भी गतिविधि क्यों करवाई जानी है, उसका एक वाजिब कारण होना चाहिए। इस लेख में इन सब बातों की चर्चा की गई है। पढ़कर देखें, शायद यह आपको भी बाल मेले की योजना बनाने में मदद करे।
गणित सीखण री जुगत की तैयारियाँ
सीखण री जुगत के लिए टीम के द्वारा दो चरणों में तैयारियाँ करना तय हुआ। पहला चरण जब टीम के सदस्यों के द्वारा की गतिविधियों का चुनाव होगा और दूसरा चरण मेले वाली जगह देवगढ़ ब्लॉक के स्कूल में बच्चों के साथ। पहले चरण में टीम के साथियों के द्वारा तय हुआ कि हम गतिविधियों को कक्षा स्तर के अनुरूप की अवधारणा के अनुसार चुनेंगे तथा इन गतिविधियों का स्तर सरल से कठिन की ओर बढ़ रहा होगा।
गतिविधियों के आधार को समझते हुए हम कम से कम उनके एक मॉडल को तैयार लेंगे। दूसरे मॉडल के लिए हम स्कूल के बच्चों से मदद लेंगे। हमने सोचा बच्चों से कुछ न कुछ काम जैसे रंग भरना, लिखना, चिपकाना, काटना, बनाना आदि करवाएँगे। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसा करने से बच्चों को उस गतिविधि से जुडी हुई अवधारणा का परिचय होगा। हम यह भी चाह रहे थे कि गणित विषय में समझ बनाने का एक ही तरीका जो बच्चे जानते हैं कि किताबों में लिखी अवधारणा को समझो और कॉपी पेन की मदद से हल करो बस हो गया गणित इसको तोड़ें। बच्चे गणित में भी गतिविधियाँ करते हुए, खेल खेलते हुए शुरुआती स्तर की समझ बना सकते हैं। साथ ही बच्चे खुद के द्वारा बनाए गए गतिविधि के मॉडल को लेकर प्रस्तुतिकरण करने की समझ बनाएँ क्योंकि उनमें से कुछ बच्चों की मदद हम मेले वाले दिन लेने वाले थे। कुछ गतिविधियाँ हमें इस प्रकार से भी रखनी थी जो कि शिक्षकों के लिए हों क्योंकि बच्चों के साथ हमारे शिक्षक साथी भी आने वाले थे और उन्हें भी हमें गणित समझने–समझाने के रोचक तरीके बताने थे। पहले चरण हमने चार दिन में राजसमंद में पूरा किया।
गणित की गतिविधियों का चयन
हमारी टीम के द्वारा सोचा गया कि बच्चों को गणित के रोचक रूप बताने के लिए हम :
- जोड़, गुणा, बाकी, भाग की अवधारणा पर आधारित गतिविधियाँ
- कार्ड बोर्ड से बनी ज्यामितीय आकृतियों से पैटर्न बनाना
- खेल जिन को सही अनुमान लगाते हुए पूरा करना
- स्थानिक मान आधारित खेल
- भिन्न की अवधारणा पर आधारित खेल
- माचिस की तीलियों पर आधारित पहेलियाँ
- संख्याओं पर आधारित खेल
- गणित में अंकों की यात्रा का संक्षिप्त परिचय
- पहेलियाँ
- अंकों से बने चित्र
- सिमेट्री पर आधारित पैटर्न
- वजन और उँचाई का मापन और उसका उपयोग
- मेवाड़ी भाषा में कविता
आधारित गतिविधियाँ बनाएँगे।
गणित के शिक्षण कार्य को सरल और रोचक बनाने के लिए शिक्षकों के लिए शिक्षक सहायक सामग्री भी डिस्प्ले करने का तय किया जिसमें :
- ज्यामितीय आकृतियों के थ्री डी मॉडल
- डींस ब्लाक टू डी एवं थ्री डी मॉडल
- तीली बंडल का उपयोग
- संख्या खिड़की
- गिनमाला
- स्थानिक मान के लिए कार्ड
- भिन्न की अवधारणा पर आधारित कार्ड
- पैसा लेनदेन की समझ के लिए नोट और सिक्के
उपरोक्त सभी अवधारणाओं को बताने के लिए हमारे पास लगभग 20-22 गतिविधियाँ तैयार हो गईं। जिनके एक-एक मॉडल हमने पहले चरण की बैठक में पूरे कर लिए। इन गतिविधियों को मिलाकर जो कार्नर बनने जा रहा था, हमने उसका नाम रखा “आओ करें माथा-पच्ची’’ ।
बच्चों की भागीदारी
दूसरे चरण में हम मेले से चार दिन पूर्व राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय तीखी, ब्लॉक देवगढ़, जिला राजसमन्द के बच्चों से मिले। जब पहले दिन हम स्कूल पहुँचे तो वहाँ के हेड टीचर एवम् गणित एवं विज्ञान के टीचर हुसैन सर एवं ज्ञानु मेडम ने हमारा स्वागत किया एवं पूर्ण रूप से सहयोग प्रदान करने का वादा भी किया जो उन्होंने निभाया भी। हेड सर के द्वारा हमें ज्यामितीय आकृति के मॉडल उपलब्ध करवाए गए जो उनके द्वारा लकड़ी से खुद बनाए गए थे।
माथा-पच्ची का दिन
ग्यारह नवम्बर मेले वाला दिन भी आ गया जिसमें हम राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय फरालिया में लगभग तीन सौ नए साथी बनाने वाले थे और उनके साथ आने वाले शिक्षक साथियों से भी विचार साझा करने वाले थे। इस विद्यालय में हमें गतिविधियाँ लगाने के लिए दो दरवाजे वाला एक कमरा एवं उसके सामने वाला गलियारा मिला था। इनके सामने एक छोटी सी बगीची में भी हमने निशाने बाजी के खेल रखे थे। हमने बच्चों को गतिविधि कक्ष में प्रवेश करवाने के लिए बगीची के पास से निकलते रास्ते को चुना। वो रास्ता कक्षा कक्ष तक आने पर खुला था कहें तो बगीची का ही हिस्सा था। हमने वहाँ गणित की गतिविधियों के लिए प्रवेशद्वार बनाया। प्रवेश द्वार से अन्दर आने पर रास्ता शुरू था जिस पर किनारे- किनारे पर थोड़े अन्तर में पेड़ लगे थे। वहाँ हमने पेड़ों के बीच धागा बाँधकर मील के पत्थर के आकर में जो चार्ट बनाए थे और उनपर अलग–अलग सभ्यताओं के समय के बारे में लिखा था लगाए।
प्लास्टर ऑफ पेरिस की मदद से शिला लेख बनाया और उस पर मिस्त्र एवं बेबिलोनियन सभ्यता के अंकों के बारे में बताया। इस तरह से हमने संख्याओं की यात्रा के बारे में बताया। सभ्यताओं के बाद गलियारे से अन्दर आने से पहले मारवाड़ी में एक कविता एवं एक से दस तक के अंकों से चित्र बनाकर लगाये थे। गलियारे में प्रवेश करते हुए बच्चों का स्वागत एक पांडा करता है जो कहता है “ आ तुझे तोल दूँ कितना खाना है बोल दूँ।’’ वहाँ पर हमने बच्चों को तोलने के लिए वेट मशीन रखी साथ ही लम्बाई नापने के लिए स्केल बनाई। बच्चे वजन और लम्बाई नापने के बाद बॉडी मास इंडेक्स जान पाए जिसमें विज्ञान समूह के साथ मिलकर हमने यह कार्य किया ।
गलियारे में आने के बाद हमने हमारे पास आए चालीस बच्चों को दो समूह में बाँट दिया। पहला समूह कक्षा कक्ष में रखी हुई गतिविधि को करेगा दूसरा समूह गलियारे में तथा बगीची में रखी गतिविधियों को।
गतिविधियाँ जो कक्षा कक्ष में थी वो इस प्रकार से थी : गिनमाला,ज्यामितीय मॉडल ,कंचे जमाओ, प्लेस वैल्यू कार्ड, डींस ब्लाक ,टेन ग्राम, संख्याओं पर आधारित जिग-सो पजल, वर्ग से चल कर वर्ग तक पहुँचो, गिनमाला,चूड़ी फेंको इकाई दहाई सैकड़ा गिनो,कुछ पहेलियाँ,संख्या खिड़की, बाहर गलियारे में टेबल पर माचिस की तीली पर आधारित पहेलियाँ जिसमें उन्हें दिए गए पैटर्न के अनुसार जमाना था,जोड़ो और आगे बढ़ो।
भिन्न की अवधारणा पर आधारित जिग्जा जिसमें बच्चों को बोर्ड पर चित्र के रूप में भिन्न को बताया था तथा बोर्ड के आकर का एक बड़ा चित्र लेकर उसे छह भाग में काटा था और उसपर पीछे की ओर संख्या के रूप में भिन्न को लिखा था बच्चों को चित्र देखकर संख्या को मिलाना था। जो छह कार्ड कटे गए थे उन्हें सही मिलाने पर एक बड़ा चित्र बनता जिससे बच्चे जान पाते कि उन्होंने सही दिशा में कार्य किया है या नहीं।
निशाना लगाना : बगीचे में दो खेल रखे गए थे जिसमें निशाना लगाना था पहला था बाल्टी में गेंद फेंकना और दूसरे में प्लास्टिक के छोटी- छोटी रोड में रिंग फेंकना था। वहीं पर पेड़ों पर गणित की पहेलियाँ लगाई थीं। बच्चे सभी खेल कम से कम एक बार जरूर करके देख रहे थे। उनके साथ आए शिक्षक साथी भी गतिविधियों एवं खेल का आनन्द ले रहे थे।
वर्ग से चलकर वर्ग तक पहुँचो पर बच्चों को कई बार खेलने पर पैटर्न समझ आ गया था और वे दूसरे बच्चों को बुलाकर शर्त लगाते फिर उनके साथ खेलने पर जीत जाते और उन्हें उस खेल का राज बताते। दोनों जिग्जा पजल पर बच्चों ने जब भी अकेले करने का प्रयास किया तो उन्हें टाइम लगा पर जब उनके साथ साथी आकर जुड़े तो वे फटाफट हल कर गए। तीलियों वाले गेम में टीचर्स ने बढ़-चढ़कर हल खोजने की कोशिश की।
कुछ किस्से कुछ यादें
एक अनुभव जो बहुत कुछ सिखा गया जैसे नए दोस्त, नए विचार, नई अवधारणा, टीम के साथ मिलकर काम करना। बच्चों को गणित विषय में रूचि के साथ कार्य करते देखना अच्छा लग रहा था। बच्चे गतिविधियों को कर के देख रहे थे और उनके पीछे के हल को खोज रहे थे। जब गतिविधि का राज वे जान गए थे तो अपने साथियों के साथ शर्त लगते और खेलने का बोलते थे ऐसा खेल खलने में उनको मजा आ रहा था। प्राथमिक स्तर पर यदि गणित विषय को इस प्रकार से रोचकता के साथ पढ़ाया जाए तो यह अपनी रोचकता के साथ बच्चों में रुचि का विषय बन जाएगा।
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