chapter 9 class 12th HISTORY यात्रियों के नज़रिए में मध्यकालीन समाज
यात्रियों के नज़रिए में मध्यकालीन समाज
भूमिका
दसवी से सत्रहवीं शताब्दी के बीच अनेक विदेशी यात्री महिला व पुरुष भारत का भ्रमण किया। यह यात्री भारत में अपने भिन्न-भिन्न उद्देश्य के लिए आए। इन यात्रियों ने अनेक वृत्तांतों की रचना की। इन वृत्तातों का विषय-वस्तु अलग-2 था। कुछ वृतांत दरबार की गतिविधियाँ, धार्मिक विषय, स्थापत्य, स्मारकों एवं भवनों से संबंधित थे और कुछ भारत के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक व प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित थे। उन्होंने भारतीयों के जीवन तथा प्रथाओं में विशेष दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने अपने अनुभवों को वृतांतों में लिखा। यात्रा वृतांत भारतीय इतिहास का पुननिर्माण करने में बहुमूल्य स्रोत सिद्ध हुए। इन यात्रियों ने यूरोपवासियों को भारतीय सभ्यता की वास्तविक तस्वीर की जानकारी प्रदान की।
अधिगम्य उद्देश्य ( Learning Objectives )
इस अध्याय का अध्ययन करने के पश्चात आप : अलवेरुनी का जीवन और किताब-उल-हिन्द में लोगों के सामाजिक और धार्मिक जीवन के बारे में पता चलेगा।
इब्न बतूता
इब्न बतूताका जीवन और उस का लिखित ग्रन्थ रिहला में नारियल एवं पान के उपर, भारतीय शहर, कृषि और व्यापार और डाक प्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी। ट्रैवल्स इन दा मुशल एंपायर में फ्रांस्वा वर्नियर ने भारत यात्रा में भारतीय भूमि स्वामित्व, राजकीय कारखाने, नगर व सामाजिक दशा के बारे में पढ़ सकेंगे।
अलवेरुनी का जीवन ( Life of Albiruni )
अलवेरुनी का जन्म 973 ई० ख्वारिज्म में हुआ था। उसने ख्वारिज्म में उच्च शिक्षा प्राप्त की। जो शिक्षा का महत्वपूर्ण केन्द्र था। उसे अनेक भाषाओं का ज्ञान था। 1017 ई० में जब महमूद गजनवी ने ख्वारिज्म पर आक्रमण किया तो वह अलवेरुनी के अपने साथ गजनी ले गया था अलवेरुनी की भारत के प्रति बड़ी रुचि थी। उसने भारतीयों ग्रन्थों को पढ़ने के लिए संस्कृत भाषा का अध्ययन किया। उसने पुराणों और भगवद्गीता आदि संस्कृत की अनेक पुस्तकों का फारसी में अनुवाद किया। भारत के विषय में उसने बहुत कुछ लिखा है।) पर शासन
किताब-उल-हिन्द (Kitab-Ul-Hind )
अल-वेरुनी ने भारत से संबंधित जिस सर्वाधिक प्रसिद्ध ग्रन्थ किताब-उल-हिन्द की रचना की इसे तारीख उल हिन्दू और तहकीक या लिल हिन्द के नामों से भी जाना जाता है यह एक विस्तृत ग्रन्थ है इसके कोई 80 अध्याय है, इसे अरबी भाषा में लिखा गया था। इस ग्रन्थ में भारत के रीति-रिवाजो, धर्म, दर्शन, त्योहारों, खगोल विज्ञान, माप-तोल, कानून, मूर्तिकला, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक जीवन के विषय में जानकारी प्राप्त होती हैं। इस ग्रन्थ को लिखने से अलवरुनो को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
1. जाति प्रथा (Caste System) :- अलवेरुनी ने 11वीं शताब्दी में भारतीय समाज में प्रचलित जाति प्रथा पर प्रकाश डाला है। उसके अनुसार भारतीय अपनी जाति पर बहुत गर्व करते थे। वे विदेशियों से बहुत घृणा करते थे उस समय भारतीय समाज में चार प्रमुख जातियाँ थी। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में समाज विभाजित थी।
ब्राह्मणों को समाज में श्रेष्ठ माना जाता था शिक्षा और धार्मिक कार्य ब्राह्मणों के पास थे।
क्षत्रिय :- का काम राज्य के शासन को देख भाल करना और उसकी सुरक्षा करना था क्षत्रिय एक सैनिक की तरह होते थे। वैश्य कृषि और व्यापार में लगे रहते थे। इन्हें ब्राह्मणों को दान और क्षत्रियों को कर देना पड़ता था।
शूद्र का समाज में बड़ा निम्न स्थान था। उनके उपर अनेक प्रतिबन्ध लगे थे उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है।
2.वर्णाश्रम (Varnashram) :- अलवेरुनी के अनुसार हिन्दू समाज में मानव जीवन को सौ वर्षों का मान कर 25-25 वर्षों के चार आश्रमों में विभाजित कर दिया गया था।
ब्रह्मचार्य:- 25 वर्ष की आयु तक विद्यार्थी गुरु के पास शिक्षा ग्रहण करते थे।
गृहस्थ :- 25 से 50 वर्ष तक अपना गृहस्थ जीवन व्यतीत करते थे।
वानप्रस्थ 50 से 75 वर्ष तक मनुष्य वनों से जाकर आध्यत्मिक तथा दार्शनिक शिक्षा प्राप्त करते थे।
सन्यास :- 75 वर्ष के बार मनुष्य अपना घर छोड़ कर सदा के लिए वनों में तपस्या करके मोक्ष प्राप्त करते थे।
3. विवाह (Marriage ) :- अलवेरुनी के अनुसार हिन्दुओं में विवाह को एक पवित्र संस्कार माना जाता था विवाह छोटी आयु में हो कर दिया जाता था।
4. स्त्रियों की स्थिति (Position of Women) :- अलवेरुनी के अनुसार उस समय समाज मे स्त्रियों की स्थिति अच्छी थी स्त्रियों को पुरी स्वतन्त्रता थी उनके बिना कोई भी धार्मिक कार्य पूरे नहीं समझे जाते थे। बाल विवाह प्रथा प्रचलित थी परन्तु विधवा विवाह की आज्ञा नहीं थी।
5.धार्मिक जीवन (Religious Condition) :- अलवेरुनी ने हिन्दुओं की धार्मिक अवस्था पर लिखा है। वे एक परमात्मा में विश्वास रखते थे इसके अतिरिक्त वे अनेक देवी देवाओं की पूजा करते थे। देवी-देवताओं की याद में अनेक मन्दिर और मूर्तियाँ बनाई थी। वे लोग यज्ञ बलि में विश्वास रखते थे और तीर्थ यात्राएँ करते थे।
इब्न बतूता (IBN Battuta)
इब्नबतूता का जीवन (Life of Ibn Battuta) :- इब्नबतूता का जन्म 24 फरवरी 1304 ई० को मोरक्को के तैंजियर शहर में हुआ उसने उच्च शिक्षा प्राप्त की। इब्नबतूता को यात्राएँ करने का बड़ा शौक था। 22 वर्ष की आयु में उसने विभिन्न देशों का भ्रमण करने का निर्णय किया सर्वप्रथम वह मक्का गया। उसके बाद सीरिया, इराक, फारस, यवन, ओमान, पूर्वी अफ्रीका को यात्राएँ की। उसने भारत भ्रमण भरने का निर्णय लिया। इब्नबतूता 20 मार्च 1334 ई० को दिल्ली पहुँचा। सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने उसका बड़ा स्वागत किया उसके बाद वह चीन की ओर चला गया वह चीन में वोजिंग तक गया। 1349 ई० में वह अपने देश मोरक्को वापिस पहुंचा इस प्रकार अपने 30 वर्षों तक भ्रमण किया उसने अपनी यात्रा वृतान्त का वर्णन रिहला नामक लिखी हुई पुस्तक में किया। 1377 ई० में मोरक्को में इस महान यात्री की मृत्यु हो गई।
रिहला (Rihla )
इब्नबतूता ने अपनी यात्रा का वर्णन रिहला नामक ग्रन्थ में किया। यह ग्रन्थ अरबी भाषा में लिखा गया। इब्नबतूता ने प्रत्येक उस वस्तु का वर्णन किया जो उसे अनूठी लगती थी तथा जिससे पाठक अपरिचित थे।
1.नारियल एवं पान (The Coconut and the Paan) :- उसने अपने लेखों से पाठकों को नारियल एवं पान से परिचित करवाने का प्रयास किया है। नारियल के बारे में लिखा है ये वृक्ष स्वरुप से सबसे अनोखे तथा प्रकृति में सबसे विस्मयकारी वृक्षों में से एक हैं। ये हू-बहू-खजूर के वृक्ष जैसे दिखतेहैं। इनमें कोई अन्तर नहीं है सिवाय के अपवाद के एक से कान्ठफल प्राप्त होता है और दूसरे से खजूर।
इब्नबतूता ने पान की बहुत प्रशंसा की है। उसका कहना है कि दिल्ली के बाजार में प्रायः घार के पान ही अधिकांश बिकते थे। पान एक ऐसा वृक्ष है जिसमें फल नहीं लगते बल्कि पत्तियों के लिए उगाया जाता है।
2. भारतीय शहर (Indian Cities) : इब्नबतूता ने भारतीय शहरों के बारे में लिखा है। शहरों में बड़ी संख्या में लोग रहते थे। लोग बड़े समृद्ध थे। सड़को पर भीड़ रहती थी। केवल युद्धों के समय उन्हें कष्टी का सामना करना पड़ता था। दिल्ली को भारत का सबसे बड़ा और विशाल जनसंख्या वाला शहर बताता है। महाराष्ट्र में दौलताबाद के शहर के बारे में बताता है कि यह शहर दिल्ली को चुनौती देता था।
3. कृषि और व्यापार (Agriculture and Trade ) :- इब्नबतूता अनुसार उस समय भारत में कृषि के का बहुत अधिक उत्पादन होता था भारत में प्रमुख फसलें, गेहूं, चावल, जौ, गन्ना, आम, नारियल आदि थी। दूसरे देशों के साथ व्यापार किया जाता था। भारतीय व्यापारी बड़े समृद्ध थे।
4. डाक प्रणाली :- इब्नबतूता डाक प्रणाली को बड़ा बेहतर बताता है राजा को हर प्रकार की सूचना । प्राप्त होती थी। डाक प्रणाली द्वारा राजा को बड़ी जल्दी सूचना प्राप्त हो जाती थी व्यापारियों को भी इसमें बड़ा लाभ था।
फांस्वा वर्नियर ( Francois Bernier )
फ्रांस्वा वर्नियर का जीवन (Life of Francois Bermer) :- फ्रांस्वा बर्नियर फ्रांस का रहने वाला था उसका जन्म 1620 ई० में फ्रांस में कोई गांव में हुआ था। 1652 ई० उसने डाक्टर की डिग्री प्राप्त की। उसने सीरिया, फीलिस्तीन, मिस्र की यात्राएँ की। 1656 ई० में काहिरा से जहाज द्वारा भारतीय बंदरगाह पहुंचा। 1668 ई० तक भारत में रहा उसने भारत के अनेक नगरों की यात्राएं की। 1669 ई० में वह वापिस पेरिस पहुंचा। फ्रांस के सम्राट लुई चौदहवें ने उसका भव्य स्वागत किया। सम्राट के अनुरोध पर भारत भ्रमण सम्बंधी अपने ग्रन्थ "ट्रैवल्स इन दा मुगल एंपायर का 1670 ई० में प्रकाशन हुआ। 1688 ई० में फ्रांस के इस महान विद्वान की मृत्यु हो गई।
ट्रैवल्स इन दा मुग़ल एंपायर (Travels in the Mughal Empire )
फ्रांस्वा वर्नियर ने 1670 ई० में अपने भारत यात्रा संबंधी ग्रन्थ ट्रैवल्स इन दा मुगल एंपायर का प्रकाशन किया। इसे फ्रांसीसी भाषा में लिखा गया था।
1. भूमि स्वामित्व (Landownership) :- फ्रांस्वा बर्नियर ने लिखा है कि उस समय भारतीय किसानों की दशा बड़ी सोचनीय थी। अधिकतर भाग रेतीले वे थे पहाड़ी होने के कारण कृषि योग्य भूमि कम थी प्रान्तीय सूबेदारों एवं अधिकारियों के क्रूर व्यवहार के कारण किसानों को अधिक कष्टों का सामना करना पड़ता था। अपने स्वामियों की मार्गों को पूरा न कर पाने पर उन के बच्चों को दास बना लिया जाता था। वे किसानों को भूमि से बेदखल भी कर सकते थे। फ्रांस्वा वर्नियर ने भारतीय किसानों की दुर्दशा का कारण निजी भू स्वामित्व के अभाव को बताया है। सम्राट ही भूमि का स्वामी होता था। वह भूमि को अमीरों के बीच बांट देता था। सम्राट सिंचाई की सुवधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता था। अतः भारतीय खेती पिछड़ी हुई थी। किसानों को सदा ही बेदखल होने का खतरा बना रहता था। इस प्रकार भूमि पर राजकीय स्वामित्व के समाज एवं अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़े। फ्रांस्वा वर्नियर भारतीय समाज को दरिद्र लोगों के समूह से बना वर्णित करता है।वास्तव में ग्रामीण समाज का यह चित्रण सिंचाई से कोसों दूर था इसका बड़ा प्रमाण यह है कि एक भी सरकारी मुगल दस्तावेज यह नहीं दर्शाता कि राजा ही भूमि का एकमात्र स्वामी था।
2. राजकीय कारखाने (The Imperial Karkhanas) :- फ्रांस्वा वर्नियर ने मुगलों के राजकीय कारखानों की कार्य प्रणाली पर विस्तृत प्रकाश डाला है। वह इन कारखानों को शिल्पकारों और कारीगारों की कार्यशाला कहता है। इन कारखानों में कई विशाल हाल होते थे जिन में विभिन्न शिल्पकार व कारीगर रहते थे।
3. नगर (Town) :- फ्रांस्वा वर्नियर लिखता है कि 17वीं शताब्दी में जनसंख्या का लगभग 15% भाग नगरों में रहता था। वर्नियर ने अपने वृतांत, में अनेक बड़े नगरों का वर्णन किया है। इन में दिल्ली, आगरा, बनारस, मथुरा, कश्मीर, सूरत, अहमदाबाद मछलीपटनम और गोलकुण्डा आदि थे। यह नगर उत्पादन केन्द्र, व्यापारिक नगर, बंदरगाह और धार्मिक केन्द्र थे।
सती प्रथा (Sati System) :- फ्रांस्वा वर्नियर ने भारत में प्रचलित अनेक बुराइयों का वर्णन किया है जिनमे एक सती प्रथा है जब किसी पत्नी का पति मर जाता था तो उसे जीवित हो अपने पति के साथ सती होना पड़ता था जो सती नहीं होना चाहती थी। उन्हें जबरन हाथ पांव बांध कर अग्नि मे जिंदा ही पति के साथ जला दिया जाता था। बर्नियर ने स्वयं लाहौर में एक 12 वर्षीय बालिका की सती होते हुए देखा था। उस समय लोगों के मन में बाल विधवाओं के प्रति भी कोई सहानुभूति नहीं थी।
कुछ अन्य यूरोपिय यात्री
1. अब्दुर रज्जाक :- अब्दुर रज्जाक 15वीं शताब्दों का फारस (ईरान) का एक महान विद्वान था। उस का जन्म 1473 ई० में हेरात में हुआ था। उसने अच्छी शिक्षा प्राप्त की। वह विजयनगर के शासक देवराय द्वितीय के शासनकाल में 1442 ई० आया। वह लिखता है कि देवराय द्वितीय का शासन प्रबन्ध अच्छा है। व्यापार उन्नति पर था। लोग समृद्ध थे। महानवमी त्यौहार बहुत धूम-धाम से बनाया जाता था। 1482 ई० इस महान विद्वान की मृत्यु हो गई।
2. दुआर्ते बरबोसा (Duarta Barbosa) :- यह एक पुर्तगाली था। वह कृष्णदेव के शासनकाल में 1518 ई० में आया। वह लिखता है कि विजयनगर साम्राज्य बड़ा समृद्ध था लोग खुशहाल थे। वह लिखता है कि विजयनगर का वहमनी राज्य के साथ संघर्ष चलता रहता था।
3.पीटर मुंडी (Peter Mundy) : यह इंगलैंड का रहने वाला था। यह शहजहाँ के शासनकाल में 1628 ई० मे आया। वह भारत में लगभग 8 वर्ष रहा। उसने शाहजहाँ एवं उसके दरबार दारा और शुजा के विवाह के अवसरों पर निकाली गई शोभा यात्रा, नौरोज तथा मोना बाजार का वर्णन किया है।
4.ज्यों वैटिटस्ट तैवर्नियर (Jean Baptisto Tavirmir) :- यह एक प्रसिद्ध फ्रांसीसी जौहरी था। उसने भारत को छ: बार 1640 ई० से 1647 तक यात्रा की। उसने वहाँ से मिलने वाले होरों तथा मोतियों के संबन्ध में विस्तृत प्रकाश डाला हैं।
5. फ्रांसिस्को पेलसर्ट (Francisco Pelsart) :- यह एक डच यात्री था जो 17वीं शताब्दी में भारत आया। उसने भारत के गुजरात, पटना, बंगाल, आगरा, सूरत, जौनपुर, बनारस, लाहौर मुल्तान तथा कश्मीर नगरों का बहुत रोचक वर्णन किया है।
6. निकोलाओ मनूको (Nikolao Manucci - यह इटलो का प्रसिद्ध चिकित्सक था। वह 1656 ई० में भारत आया। वह 1717 ई० में अपनी मृत्यु तक वह भारत में हो रहा। उसने भारत में मुगलों के तोपखाने और चिकित्सक के रूप में कार्य किया। उसने भारत का वर्णन अपने ग्रन्थ 'स्टोरिया डो मोगोर" (Storia do Mogor) ने किया वह चाहता था कि यूरोपवासी भारत आने से पहले उसके ग्रन्थ का अध्ययन अवश्य करें।
सारांश
10वीं से 17वीं शताब्दियों के बीच भारत में अनेक विदेशी यात्री विश्व के विभिन्न भागों से आप जिन्होंने भारत के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दो हैं। ऐसे कुछ विदेशी यात्रियों में अलवेरुनी, इब्नबतूता, अब्दुर रज्जाक पीटरमुंडी, फ्रांस्वा बर्नियर, तैवनियर, मनूको हाकिंस, सर यामसल से एडवर्ड टैरी आदि के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनके लेखों से भारत के विषय में बड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
अलवेरनी के ग्रन्थ 'किताब-उल-हिन्द' से जाति प्रथा, स्त्रियों की स्थिति और विवाह प्रथा, धार्मिक अवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था और आर्थिक जीवन में लोगों की दशा के बारे में पता चलता है। इब्नबतूता के ग्रन्थ रिहला में नारियल तथा पान, भारतीय शहर दिल्ली और दौलताबाद के शानदार और विशाल नगर के बारे बताया है।
फ्रांस्वा बनियर ने शहरी केन्द्र के बारे में लिखा है कि दिल्ली, आगरा, लौहार, फतेहपुर सीकरी, अहमदाबाद, सूरत आदि प्रसिद्ध नगर थे। उसने ग्रामीण समाज और किसानों की दशा के बारे में विस्तृत वर्णन किया उसने लिखा है कि सती प्रथा एक बहुत बड़ी सामाजिक बुराई थी। इसके अतिरिक्त अन्य यात्रियों ने भी भारतीय दशा के बारे में वर्णन किया है।
परीक्षापयोगी प्रश्न
1. किताब-उल-हिन्द पर नोट लिखें।
2.इब्नबता कौन था ? वह भारत कब आया ?
3. अलवेरुनी कौन था ?
4.ट्रैवल्स इन दा मुगल एंपायर क्या हैं ?
5. दुआर्ते बरबोसा कौन था ?
6.अब्दुर रज्जाक कौन था ?
7. पीटर मुंडी कौन था ?
8. फ्रांस्वा बर्नियर ने सती प्रथा के बारे में क्या लिखा है ?
9.अलवेरुनी कौन था ? उसने 11 वीं शताब्दी के बारे में भारत पर क्या प्रकाश डाला है।
10.इब्नबतूता ने भारतीय कृषि और व्यापार के बारे में क्या लिखा है ? संक्षिप्त में लिखिए।
11.यूरोपीय यात्रियों का भारत में भ्रमण का क्या उद्देश्य था ?
12. फ्रांस्वा वर्नियर कौन था ? उसने भारतीय किसानों की दशा का वर्णन कैसे किया है ?

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