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History 12 Chapter -7

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 Class 12 History Chapter 7 Notes एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर → विजयनगर अथवा 'विजय का शहर' एक शहर एवं एक साम्राज्य दोनों के लिए प्रयोग किया जाने वाला नाम था। → चौदहवीं शताब्दी में स्थापित विजयनगर साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष के समय उत्तर में कृष्णा नदी से लेकर प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला हुआ था।  → विजयनगर को 1565 ई. में आक्रमण कर लूटा गया। धीरे-धीरे 17वीं-18वीं शताब्दियों तक यह शहर पूर्ण रूप से नष्ट हो गया, फिर भी कृष्णा-तुंगभद्रा दोआब क्षेत्र के निवासियों में इसकी स्मृति शेष रहीं, उन्होंने इस शहर को हम्पी नाम से याद रखा। इस नाम का प्रचलन यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से हुआ था।  → ईस्ट इंडिया कम्पनी में कार्यरत अभियंता एवं पुरातत्वविद कॉलिन मैकेन्जी ने 1800 ई. में हम्पी के भग्नावशेषों को खोज निकाला। उसने इस स्थान का व्यापक सर्वेक्षण कर एक मानचित्र तैयार किया। उसकी प्रारंभिक जानकारियाँ विरुपाक्ष मन्दिर एवं पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थीं।  → अभिलेखों तथा परम्परा पर आधारित साक्ष्यों के आधार पर इतिहासकारो...

History 12th Chapter -6

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Class 12 History Notes Chapter 5 यात्रियों के नज़रिए : समाज के बारे में उनकी समझ → मध्यकालीन भारत (लगभग दसवीं से सत्रहवीं सदी तक) के राजनीतिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक जीवन के इतिहास का अध्ययन करने के लिए कई स्रोत उपलब्ध हैं; जिनमें से मुख्य स्रोत उन विदेशी यात्रियों द्वारा लिखित वृत्तान्त हैं, जिन्होंने मध्यकाल में भारत की यात्रा की थी।  → मध्यकाल में भारत में अनेक विदेशी यात्री आए; जिनमें अल बिरूनी (ग्यारहवीं शताब्दी), इब्न बतूता (चौदहवीं शताब्दी), फ्रांस्वा बर्नियर (सत्रहवीं शताब्दी) आदि प्रमुख थे। → अल बिरूनी का जन्म आधुनिक उज्बेकिस्तान में स्थित ख्वारिज्म (शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केन्द्र) में 973 ई. में हुआ था।  → अल बिरूनी सीरियाई, फारसी, हिब्रू, संस्कृत आदि भाषाओं का अच्छा ज्ञान रखता था। → सुल्तान महमूद गजनवी ने 1017 ई. में ख्वारिज्म पर आक्रमण किया। वह विद्वानों का बहुत सम्मान करता था इसलिए ख्वारिज्म के कई विद्वानों एवं कवियों को अपने साथ अपनी राजधानी गज़नी ले आया, अल बिरूनी भी उनमें से एक था।  → गज़नी में ही अल बिरूनी की भारत के प्रति रुचि विकसित हुई। पं...

CLASS 12 HISTORY CH-5

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  Class 12 History Notes Chapter 5 यात्रियों के नज़रिए : समाज के बारे में उनकी समझ   अल-बिरुनी (AL-BIRUNI) Ll अल-बिरुनी 11वीं शताब्दी में मध्य एशिया का सबसे महान् विद्वान् था। वह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था। वह हिंदू दर्शन से बहुत प्रभावित हुआ। उसने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ किताब-उल-हिंद में भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के संबंध में विस्तृत प्रकाश डाला है। इस ग्रंथ को मध्यकालीन भारतीय इतिहास का एक बहुमूल्य स्रोत माना जाता है। अल्-बिरूनी (Al-Biruni) मध्यकालीन इस्लामी जगत का एक महान विद्वान, वैज्ञानिक, गणितज्ञ, भूगोलवेत्ता, खगोलशास्त्री और भारतविद् था। उसका पूरा नाम अबू रायहान मुहम्मद इब्न अहमद अल-बिरूनी था। उसे भारत का "विदेशी यात्री" और "प्रथम वैज्ञानिक पर्यटक" भी कहा जाता है। उसका जीवन संक्षेप में इस प्रकार है:    अल-बिरूनी का जीवन 1. जन्म अल-बिरूनी का जन्म 4 सितम्बर 973 ई. में ख़्वारिज़्म (वर्तमान उज्बेकिस्तान क्षेत्र) में हुआ। वह ख़्वारिज़्म साम्राज्य के बिरून नामक गाँव का निवासी था, इसी कारण उसका नाम अल-बिरूनी पड़ा। 2. शिक्षा उसने प्रारम्भ से...

HISTORY 12TH CHAPTER -4

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"विचारक, विश्वास और इमारतें (600 ई. पू. – 600 ई.)"। यह अध्याय भारतीय उपमहाद्वीप में धार्मिक और दार्शनिक विचारों के विकास, आस्थाओं में बदलाव और स्थापत्य के माध्यम से उनकी अभिव्यक्ति का अध्ययन कराता है। 🔍 पूर्वावलोकन (Overview of Chapter 4): 🕉️ 1. नए विचारों का जन्म (600 ई.पू. के बाद): वैदिक धर्म की आलोचना और धार्मिक पुनर्जागरण। महावीर (जैन धर्म) और गौतम बुद्ध (बौद्ध धर्म) के विचार और शिक्षाएँ। श्रमण परंपरा का विकास और समाज में उसका प्रभाव। 📜 2. बौद्ध धर्म और जैन धर्म का विकास: बौद्ध संघ और विहारों की स्थापना। त्रिपिटक और अंगों जैसे जैन ग्रंथों का निर्माण। मोक्ष, अहिंसा, आस्तेय आदि सिद्धांत। 🏛️ 3. धर्म, भक्ति और सामाजिक परिवर्तन: बौद्ध धर्म का राजा अशोक द्वारा संरक्षण। भगवती परंपरा और पुराणों का विकास। भक्ति आंदोलन की प्रारंभिक झलकियाँ। 🛕 4. स्थापत्य और धार्मिक स्थान: स्तूपों (सांची स्तूप), मंदिरों, विहारों और मठों का निर्माण। स्थापत्य में प्रतीकवाद – जैसे स्तूप का गुंबद, हरमिका, चक्र आदि। अजंता, एलोरा, नागार्जुनकोंडा आदि स्थानों के चित्र और मूर्तियाँ। ...